Teesri Sarkaar Jagrukta Abhiyaan

This blog is quite different from a normal blog. The reason I will tell you. This is because in this blog the major content is the script of a street play that I wrote for the awareness campaign that is being carried out my by organization for the Panchayat Elections.  This campaign is called the TEESRI SAKRAAR JAGUKTA ABHIYAAN. We started this campaign in the month of March. What our aim with this campaign is that we go to the villages where we work in and conduct meetings in the community to raise awareness in the community about the whole idea of the Panchayati Raj system. There are some things that we target in this campaign which are telling the community what their roles as voters are in the Panchayat Samiti.

The other idea was spreading the idea that he Panchayat in the village is the system of governance for the people of the people and by the people. We were also telling the community about the technical aspects of this such as the structure of the Panchayat Samiti. What are the things that in the control of the voters- things like choosing the right candidate to lead them for the next five years and when we would talk about this we would tell them and share with them the qualities of the perfect candidate who will lead them. We would also make them aware about their rights and duties that they have towards the Panchayat Samiti.

The theatre team with which I am associated in my organization had the responsibility to do a play on this topic. I sat with my whole team and we had a kind of a small workshop for three days where we were all sitting together and doing a lot of brainstorming to create a good script that we could perform in the community as a play. What follows in the rest of the blog is the script of that play that we performed in the villages that we went to for the meetings as part of the TEESRI SARKAAR JAGRUKTA ABHIYAAN.

पंचायती राज

पुरुषे वेदं सर्व यद् भूतं ,

यच्च भाव्यम उत्तामृत तवस्ये शानो यदने नाति रोहति ,

मनुष्य मनुष्य में सर्व शक्तिमान हूँ

हवा को चाहू रोक दूँ , नदी को चाहू मोड़ दूँ

आकाश में उड़ रहा , धरा पर तेज़ दौड़ता – २

हवा को पीछे मैं छोड़ता , अंतरिक्ष को मैं भेदता

चाँद पर कदम रखा , मंगल की मुझको चाह है |

बसाऊ ग्लोबल बस्तियां ये नया एक सपना है |

{एक शक्तिशाली इंसान का प्रवेश, सभी कोरस को पीटता है, कोरस के साथ बैल की तरह बर्ताव करता है |}

आदमी : क्या तुम अपने और अपने देश,अपने गाँव के बारे में सोच सकते हो?

कोरस : नहीं !

आदमी : क्या तुम अपने और अपने गाँव के बारे में कोई निर्णय ले सकते हो?

कोरस :  नहीं !

आदमी :  तो क्या तुम अपने और अपने गाँव  के लिए कुछ कर सकते हो ?

कोरस : नहीं ! लेकिन ऐसा क्यों है ?

आदमी: क्योंकि तुम आज़ाद नहीं हो , और तुम्हारी और तुम्हारे गाँव की बागडोर हमारे हाथों में है |

आदमी 1 : आज़ादी के बाद भी तुम्हे सची आज़ादी नहीं मिली, गाँधी के सपने को हमने पूरा नहीं होने दिया और तुम्हे आपस में लड़ाकर तुम पर राज करते रहे |

कोरस 1: महात्मा गाँधी ने भारत की आज़ादी को भारत के गांवों की आज़ादी के रूप में देखा था | इसीलिए उनका मानना था की जब तक भारत के गाँवों को आज़ादी नहीं मिलती तब तक भारत की आज़ादी अधूरी है |

कोरस 2: भारत का गाँव एक सांस्कृतिक इकाई है जो परिवार और पड़ोस से मिलकर बनती है | इस सांस्कृतिक इकाई का जो स्वरुप प्रारंभिक रूप में विकसित हुआ वह गाँव समाज है | भारत का यह गाँव- समाज दुनिया के बेहतर लोकतंत्र के रूप में चिन्हित होता रहा है |

कोरस 3:  इसी गाँव – समाज के बेहतर संचालन के लिए आपसी बैठक के रूप में जो सहज जीवन पद्धति अपनाई गई उसे पंचायत की संज्ञा दी गई है | संवाद, सहमती, सहयोग, सहभाग और सहकार जैसे पांच तत्वों पर  आधारित जीवन शैली जिसे पंचायत कहा गया, उसी ने शताब्दियों से भारत के गाँव समाज को प्रकाशंतर से भारत की संस्कृति को सुरक्षित और संवर्धित किया है |

आदमी 1 : लेकिन क्या जो तुम बक रहे हो, उसे ज़मीन पर उतार पाए ?

कोरस 3: उसी का तो प्रयास कर रहा हूँ , और यह सब भाई बहन हमारे साथ है |

आदमी 1:  कोई तेरे साथ नहीं आएगा यह सब लालच में अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी करेंगे | इनको मैं सालों से जानता हूँ | एक टुकड़ा फेंको और यह दुम हिलाते हुए आयेंगे और मेरी ही बोली बोलेंगे |

{जयकार होता है}

मुखिया:  प्रणाम चाची जी , ठीक बानी नू , राउर तबियत सही बानू, हम वोट मांग तानी , हमार चुनाव चिन्ह बा ( बकरी चाप) तनी हमरा पर ध्यान देवे के होई चाची जी |

बुढ़िया : का ध्यान दिहल जाई ऐ बाबू | जेहि आवत से ईहे कहता की ध्यान देवे के होई चाची | आ जब जीत जा तालो त हमनी के घरे झांकियों पारे नहीखे लो आवत | अछा हम अपने घरे स्वांग से सोच विचार करब, देखल जाई |

मुखिया: देखे के न चाही चाची , हाई लिही {परचाया दे तरन}

बुढ़िया : ठीक बा हमर बाबु | {जयकार होता है}

{चाय पीने का स्थान जहाँ लोग इकठ्ठा होते है}

आदमी 1: का भाई का समाचार बा केकरा पर वोट देवे के बा?

आदमी 2: हमरा त सोचे के नईखे बकरी चाप जिंदाबाद हम ओही पर वोट देहब | ऊ बहुत अच्छा प्रत्याशी बाडेन |

आदमी 3: बड़ा बकरी चाप पर जोर बावे तोहार , कुछु मिलल बा का ?

 आदमी २ : तब का जे जीतता से आवते नईखे , जवने हाथ तवने साथ

आदमी 1: तू त ठीक कह तरन भाई लेकिन मनवा त बडिले बानी सन हमनिए के नू | जब हमनी के पहेलिए बेचा जा तानी सन पईसा पर, दारु पर , साडी पर , कम्बल पर, राशन पर हर चीज़ पर | त तुही लो बताव हमनी के त कवनो काम सोच के नहिखे सन करत की कौन प्रत्याशी ठीक और कवन ठीक नहिखे ?

आदमी 2: त तुही बताव ना , जे मुखिया आवत से उहे कहता की हम हई करेब , हम हु करेब अ जीतला के बाद केहू कुछ नहिखे करता |

आदमी 3: हमनी के वोट के बहुत महत्व बा, हमनी के वोट के बहुत कीमत बा, हमनी के भुत सोच विचार करे के चाही , की कवन प्रत्याशी ठीक बा हमनी के ओही पर वोट देवे के चाही, जे जेहि तरह कहे ओही तरे नहिखे करके, हमनी के सोचे के पड़ी |

आदमी 2:  ठीक बा भाई हम चल तानी |

{जयकारा होता मुखिया गाँव के चौराहे के एक चबूतरे पर भाषण दे तारे}

मुखिया: सब के हमर हाथ जोड़ कर प्रणाम बा हमार चाप बा बकरी! हम रउवा सब से वादा कर रहल बानी की हमरा के रउवा सभे जिताई | मुह्किया के जवन- जवन काम होला तवन हम करके देखाईब | ई हमार वादा बा |गाँव के रोड बनवा देब | घर घर में शौचालय की सुविधा होई , हमर मई बहन के इज्ज़त खातिर | घर में सबके बिजली आई राशन टाइम पर मिली तेल टाइम पर मिली| सबकर विकास होई |

बुढिया: एय मुखिया जी ऐहिंग सब केहू कहेला की हमरा के वोट दी हम हई करेब हम हऊ करेब | जीत जाला पर केहू न आवेला | रुआ पर हमनी के कईसे विशवास कर ली सन हो ?

मुखिया: हमरा पर रुआ लोग विशवास करी सभ हम सब चीज़ का इंतज़ाम करेब , सबके कॉलोनी के पैसा दियाईब , वृधा पेंशन भी मिली | {जयकारा} {मुखिया जीत जाता है उसके बाद}

आदमी 1: मुखिया जी हमरा कितना साल कलोनी नहिखे मिलत की हम आपण घर बनवाई , हमार कलोनी पास करवा दी ना | हम राउर एहसान कभो ना भूलब |

मुखिया: ठीक बा रउवा ई तरीक के आई |

आदमी 1 : ठीक बा परनाम |

आदमी 2: मुखिया जी एगो हमारा द्वार पर कल हलवा दीना | बड़ा दिक्कत होता |

मुखिया : ठीक बा रउवा एह तरीक के आई |

आदमी 3: मुखिया जी , प्रणाम हमनी गाँव में नाली के बहुत दिक्कत बा | पानी सब रोड़े पर बहता | तनी एगो फण्ड पास करवा दीं ना नाली बनवाए के

मुखिया: ठीक बा हम बात करब रउवा जायीं |

{सब लोग दो- चार बार मुखिया के द्वार पर दौड़ता , मुखिया से मुलाकात ही नहिखे होत, कभो मुखिया कबो कहा त कबो कहा रहा तरना}

{चार लोग चाय की दूकान पर}

आदमी 1: ऐ यार देख ना हम मुखिया जी के द्वार पर गईल रहनी हा मुखिया जी से क्लोनी आ वृधा पेंशन पास कारवे के रहल हा |मुखिया जी हमरा के हे दिन के टाइम देले रहलन उनकरा से वेट नहिखे होत का कईल जाव | कितना दिन बीत गईल

{सब कोई आपन बात कहता , तभी गाँव का एगो समझदार आदमी आवत}

समझदार आदमी : आप लोग ने इस नाटक को देखा की किस प्रकार से हम लोगों के गाँव का विकास नहीं हो पा रहा है | इस लिए हम लोग एक मत होकर ऐसे प्रत्याशी को चुने जो हमारे गाँव के विकास के बारे में सोचे और गरीबो की सहायता करे | इसके लिए हम सब गाँव वालों को मिलकर आपस में सोच कर अपने मुखिया चुनना होगा | हम लोग को कोई लालाच दे तो उस लालाच में नहीं पड़ना है | जैसा की हम लोग सुने भी कही की लालाच बुरी बाला है | और हम अपने को नहीं पहचान रहे की हम ही वो जनता हैं जो दुनिया बदल सकती है | हम गाँव की जनता में वो शक्ति है की जो चाहे हम करा सकते हैं | लेकिंग क्या हम गरीब लोग अपनी शक्ति को पहचान पा रहे हैं? इसलिए हम अपने आप को पहचाने की हम क्या हैं | और अपना मुखिया ऐसा चुने जो गाँव के गरीब लोगों के हित में सोच सके तभी तो हमारा गाँव आगे बढेगा | और इस्ससे देश का भी विकास होगा | लालाच में पढ़ के किसी को वोट न दें | यह नहीं है की नीची जात के मुखिया उठे है तो हमें जाती पाती नहीं देखना है | हमे बस यही देखना है की कौनसा मुखिया पाने गाँव के लिए सही है |

{पंचायती राज के आइल्बा चुनावा गाना से अंत}

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