आइले नागडा लेके इप्टा मैदान में

जी हाँ मेरे इस ब्लोग का यह नाम आपको पढ़ने में थोडा अटपटा ज़रूर लगेगा और ऐसा लगना उचित है क्युंकी ऐसी चीज़ के लिए ऐसा नाम अटपटा ही होता है | इस नाम के पीछे का रहस्य इस ब्लॉग में है | यह बोल है कामरेड चन्द्रशेकर के द्वारा लिखे गए एक गाने के हैं | यह गाना भारत के प्रसिद्ध नाट्य मंडली इप्टा का एक गाना है | अब आप लोग सोच रहे होंगे की मैं आपको इस गाने के बारे में क्यों बता रहा हूँ ? इसका भी जवाब है मेरे पास

अभी कुछ दिनों पहले हमारी परिवर्तन की नाट्य मंडली बिहार के बेगुसराय जिले के पास बिहट नमक एक छोटी सी जगह में इप्टा बिहार के एक सम्मलेन में अपने कुछ नाटक लेकर गए थे | बिहट के बारे में मैं आपको थोड़ी जानकारी दे दूँ की यह आखिर इतना जाना माना स्थान क्यों है | यहाँ बेगुसराई की भूमि से कई जाने माने नाम के लोग पैदा हुए हैं जैसे के कामरेड चंद्रशेखर भरद्वाज जो की इप्टा के काफी वरिष्ट सदस्यस थे | इस जगह की एक और खासियत यह भी है की इसी जगह से आज कल प्रसिद्ध हो रहे युवा नेता ओम्रदे कन्हिया kumar का जन्म भी बिहट में ही हुस था | अब इस जगह के बारे में आपको काफी बता चूका हूँ, अब मैं आपको बताता हु मैं वहां क्यूँ गया था |

इप्टा के द्वारा हर साल कामरेड चन्द्रशेकर के जन्मदिन के उत्सव में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है | इस बार का कार्यक्रम २६ अप्रैल से 2 मई तक आयोजित हुआ था | परिवतन रंग मंडली को इप्टा ने आमंत्रित कियस था की हम अपने कुछ नाटक प्रस्तुत करें | हमारा बिहट का दौरा ४ दिन का था जिसमे हमने दो दिन गन्नो की प्रस्तुति करी और दो दिन दो नाटको का मंचन किया था |

हमारे अलावा और भी नाट्य दलों ने अपनी प्रस्तुति की थी | जो नाटक हमारे दल ने किये थे वो थे बिखरी ठाकुर द्वारा लिखित नाटक बेटी बचवा और उर्मिल थपलियाल द्वारा लिखित नाटक तुम सम पुरुष नमो सम नारी | इन दोनों नाटकों के अलावा हम लोगों ने कुछ गानों की प्रस्तुति भी की थी | 1 मई जो की मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है तो इसके उपलक्ष में हम लोगों ने मजदूरों से संभंधित कुछ गाने गाए थे और एक दिन हमने सूफी संतों के गाने गाये थे |

मेरे लिए यह अनुभव काफी लाभदायक था क्यूंकि मैंने हमेशा से इप्टा का नाम सुना था मगर उनके साथ जुड़ने का यह मेरे लिए पहला मौका था और मुझे काफी ख़ुशी हो रही है की मैं वहां अपनी रंग मंडली के साथ जा सका | दुसरे दलों का नाटक देखने का जो अनुभव था वो मुझे काफी समय से नहीं मिला था और इस उत्सव में मुझे यह मौका भी मिल गया और मैंने काफी आचे नाटक देखे थे | मेरे लिए यह सफ़र खाली नाटक करने अ देखने तक सीमित नाह था क्यूंकि जब से मैं इस मंडली के साथ जुड़ा हुआ हूँ तब से मेरी भागीदारी ग्रुप को संभालने की है | एक तरह से मैं टीम का मेनेजर हूँ| और मेनेजर होने के नाते मेरा काम होता है यह देखना की सारा काम तरीके से हो रहा है की नहीं और जब भी हम लोग कहीं बहार जाते है तो पूरी तकनिकी ग्स्तिविधियों को स्मभालने का काम मेरा होता है | मुझे परिवर्तन में आने से पहेले ऐसे मौके नहीं मिले थे और इसके चलते मुझे इस प्रकार के काम करने का कोई अनुभव नहीं था| पर मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा की मैं ऐसी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभा सकता हूँ |

यही अनुभव मुझे इप्टा के सम्मलेन में मिला था | और इसके लिए मैं बहुत खुशकिस्मत हु की परिवर्तन के चतले मुझे ऐसा अनुभव प्राप्त हुआ |

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