Jayesh : A Vigyan Fellow

जयेश – अ विज्ञानं फेलो

इंडिया फ़ेलोशिप की तरह ही विज्ञानं आश्रम का भी अपना फ़ेलोशिप प्रोग्राम है जिसमे कि कम से कम 8th पास कोई भी व्यक्ति अपने ही आइडियाज और पैशन के लिए टेक्नोलॉजी से जुड़कर, एक सफल उद्योजक बनने की सारी बारिकिया सिख सकता है, ये 6 महीनो का आवासीय प्रोग्राम है, जिसमे कि 3 महीने विज्ञानं आश्रम मे शिक्षण मिलता है और 3 महीने फील्ड पर, जो कोई इस प्रोग्राम से जुड़ता है, फ़ेलोशिप पूरी होने के बाद उसे, स्वयं का व्यवयास शुरू करने के लिए, एक साल तक विज्ञानं आश्रम की तरफ से तकनिकी व आर्थिक निर्देशन भी प्राप्त होता है, तथा विज्ञानं आश्रम के सहयोग से अलग-अलग माइक्रो फाइनेंसिंग संस्थाओ की तरफ से एक ब्रिज लोन के रूप मे आर्थिक सहायता भी प्राप्त होती है, साथ ही साथ PRAJ – संसथान की और से फ़ेलोशिप के दौरान 6,000 मासिक मानदेय भी प्राप्त होता है, जिससे की वह अपने खर्चे खुद वहन कर सके.

जयेश एक 10th पास माद्यमिक परिवार का लड़का है जिसके घर मे आय का प्रमुख स्र्तोत पारम्परिक खेती ही है, अपना घर व जमीन होने के बावजूद भी वह समाज की मुख्य धारा से कटा हुआ था. जयेश आज से दो साल पहले विज्ञानं आश्रम के संपर्क मे आया, और टेक्नोलॉजी की तरफ रुझान के चलते, डी.बी.आर.टी. कोर्स से जुड़कर एक साल तक विज्ञानं आश्रम मे प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस कोर्स से जयेश को आगे चलकर क्या करना है और क्या नही ये तो स्पष्ट हो गया लेकिन अभी मंजिल और दूर थी, क्योकि जयेश को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए एक राह चुनकर उसमे अनुभव हासिल करना जरूरी था, उसकी इस उलझन को दूर करने के लिए विज्ञानं आश्रम ने जयेश को 6 महीने का फ़ेलोशिप प्रोग्राम ऑफर किया जिसमे उसने बकरी पालन व्यवसाय मे अनुभव हासिल करने का निर्णय लिया, और 3 महीने और बकरी पालन की बारीकियो के बारे मे सिखने लगा, जैसे की लागत कितनी है, खर्चा कितना है, कौन – कौन सी बीमारिया है, बकरियों से सम्बंधित आदि. पिछले 5 महीनो मे जयेश ने अलग अलग फार्मस को भी पास से देखा, जहा एक साथ 500 से 5,000 बकरियों का एक साथ पालन होता है, और साथ ही किस तरह एकुँफोनिक्स व ह्य्द्रोफोनिक्स जैसी तकनीक को किस तरह अधिक उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, इतना सब कुछ करने के बाद अब उसे जरुरत थी तो आर्थिक मदद की, जिससे वह अपना व्यवसाय शुरू सके,

दो महीने पहले से ही हमने उसके बिज़नस प्रपोजल पर काम करना शुरू कर दिया था, धीरे-धीरे हमने उसके बजट को अंतिम रूप देकर, एक माइक्रो-क्रेडिट संस्था को भेजा था, शुरुआत मे कुछ दिक्कते आई ऋण मिलने मे, क्योकि संस्था को समझना थोडा मुश्किल हो रहा था की कैसे एक 20 साल का लड़का अपना व्यवसाय न सिर्फ शुरू करेगा बल्कि उसकी मदद से और लोगो को भी रोजगार उपलब्ध कराएगा, और एक बात थी बकरी पालन के व्यवसाय मे शुरुआत मे इतना मुनाफा दिखाई नही देता है, लेकिन जैसे जैसे काम बढ़ता है, आगे चलकर यही मुख्य हो जाता है. लेकिन बहुत विचार-विमर्श के बाद और एक दिन विज्ञानं आश्रम आकर जयेश से मिलकर, उसके ज्ञान को परखकर और लगन को देखकर, संस्था ने अपनी मंजूरी दे ही दी और साथ ही, ऋण को पुन: भरने के लिए हर तीन माह के बाद का समय भी दिया, जो की सिर्फ एक महीने का ही होता है, जब जयेश को मैंने ये बताया, तो वो काफी खुश हुआ, उसने उस दिन विज्ञानं आश्रम मे चाय पिलवाई और नाश्ता भी करवाया.

वो दिन था और आज का दिन है, जयेश अपना व्यवसाय शुरू करने की तैयारियो मे लगा हुआ है, रोज एक नई उमंग, जोश और उत्साह के साथ अपने व्यवसाय को शुरू होते देखने व उसे सफल बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ काम कर रहा है.

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