साधारण से विशेष

भारत ने ब्लास्टिक मिसाइल अग्नि 4 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, यह खबर सुन कर मेरी तरह ही लाखों भारतीयों के मन में ख़ुशी की लहर अवश्य ही दौड़ी होगी| निस्संदेह, यह राष्ट्र की बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिससे  नागरिकों में गर्व एवं राष्ट्र सुरक्षा की भावना का भी विस्तार हुआ होगा। वर्ष प्रति वर्ष अग्नि चार और पांच जैसे ताक़तवर नाभिकीय शास्त्र का परीक्षण करना किसी भी देश को विश्वसनीय नाभिकीय शक्ति संतुलन प्रदान करता है।

इंटरनेट पर यह खबर देखते ही मन में गर्व की भावना उठी किन्तु दूसरे ही पल ना जाने कहा से मुंशी प्रेम चन्द्र की कहानी, “पर्दा” याद आ गयी और ध्यान मिसाइल की ३००-४०० किलोमीटर रेंज की मारक क्षमता से हट कर UPSRTC (उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) की उस बस पर चला गया, जिसमे मैंने एक दिन पहले ही मथुरा से नौझील का सफर तय किया था।

उन टूटी फूटी सड़को पर UPSRTC की टूटी फूटी बस के कल पुर्जे भी झूम रहे थे| सड़क की हालत ऐसी थी की 300 से 400 किलो मीटर तो छोड़ीये, किसी किसी स्थान पर बस का 300-400 मीटर भी बिना कूदे चलना मुश्किल था। उस बस में जितने यात्री सीट पर बैठे थे, उतने ही खड़े और बाहर लटके हुए भी थे| बस में भरे हुए यात्रियों को देख कर समझ नहीं आ रहा था की, बस सेवाओं का अकाल है या जनसंख्या ही इतनी ज्यादा है. बहरहाल, यह उसी जनसँख्या का एक भाग है जिसकी भविष्य में सुरक्षा की गारंटी के लिए ही शायद नाभिकीय सस्त्र का निर्माण किया गया है|

लेकिन क्या इतने मात्र से ही इनका भविष्य सुरक्षित है? या फिर क्या यह केवल एक विशेष प्रकार की ही सुरक्षा की बात नहीं है, जो मुख्यतः आपात या विशेष स्थिति से संबंधित है?

साधारण स्थिति में, उनमें से अधिकतर को इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता की उनके घर में पिछले एक महीने से बिजली नहीं आई है, चिंपारै में मेरे पड़ोस में रहने वाली १६ साल की लड़की, जो 7 माह की गर्भवती है, और जो हमेशा ही बुखार से तपती रहती है, वह भी उनके लिए साधारण सी बात है, वहां स्कूल – कॉलेजों में डिग्रीयां, पैसे और नक़ल पर ही मिल जाती है और युवाओं में भविष्य को लेकर कोई उन्मुखीकरण नहीं दिखता, बच्चा थोड़ा बड़े होते ही, सिगरेट, शराब तथा अन्य मादक पदार्थो कि गिरफ्त में आ जाता। यह भी इनके लिए बड़ी ही साधारण बात है. चुनाओ, विकास के लिए नहीं सिर्फ और सिर्फ जीतने क लिए लड़े जाते वह भी माल-जान की कीमत पर| क़ानून और व्यवस्था? बहरहाल, इतने कम दिनों में ऐसी किसी भी चीज़ के यहाँ सक्रिय होने का मुझे प्रमाण नहीं दिखा।

यह भी हो सकता है की यह सारी चीज़ें उतनी ही साधारण हो, जितनी उन्हें लगती है। मेरे लिए तो यह दोनों ही स्थिति या तो साधारण है, या दोनों ही विशेष। किन्तु यह साधारण सी दिखने वाली स्थिति किसी विशेष तर्क की ओर ले जा सकती है. जीवन में साधारण से विशेष का उपागम ही सर्वोत्तम है और सतत भी. इन साधारण सी समस्याओं अथवा स्थिति में सुधार ही इस जनसँख्या को सुरक्षित भविष्य दे सकता है. बिना इनमे सुधार हुए, किसी विशेष स्थिति को रख कर साधारण स्थिति पर पर्दा नहीं डाला जा सकता।

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