Ek Kadam Manzil Ki Aur

एक कदम मंज़िल की ओर …

ये जानना की आप सही रास्ते पे हो या नहीं, थोड़ा मुश्किल और परेशानियों भरा जरूर होता हे लेकिंन इसके बिना आप अपना मूल्यांकन भी नहीं सकते।

उदयपुर से निकलकर विज्ञानं आश्रम पहुचना, सफर में एक कदम और मंज़िल की तरफ बढ़ाने जैसा था, पूरा एक महीना हो गया यहा लेकिन फिर भी कुछ मिसिंग लग रहा है शायद अभी थोड़ा ओर समय चाहिए, वो अनुभव फिर से पाने के लिए जो उन 15 दिनों की इंडक्शन ट्रेनिंग के दौरान हुआ, और लगा बस यही तो मिसिंग था, यही तो वो आकांशा है जिसके लिए 28 नौजवान बिना कुछ जाने अनजाने लोगो के बीच जा पहुंचे … ये एक विश्वास की तरह जो हममे से बहुतो ने कई बार अपने आप पर किया लेकिन कुछ खास सफलता हासिल नहीं हुई, तो इस बार ये मौका इंडिया फेलो प्रोग्राम को दिया और अभी तक काफी हद तक ये सही भी साबित हुआ है, आगे नहीं पता, शायद इसलिए की मैं आगे क्या आने वाला है ये सोच कर आज जो है उसे नहीं खोना चाहता।

शुरुआत में तो लगा जैसे क्यों में अपने घर से इतनी दूर आया, सिर्फ पैसो की खातिर तो ये नहीं हो सकता क्योकि वो तो में उज्जैन मे रहकर भी कमा सकता था, और बात रही सामाजिक बदलाव की, तो जो दिमाग में फितूर था की NGO मे जाकर ये बदलेंगे वो बदलेंगे सब हवा हो गया अपने आप को ही बदलना और यह के हिसाब से ढालना मुश्किल हो रहा था, गिन-गिन कर रोटी खाना, एक कम न एक ज्यादा, भूल जाने पर तीन बार तक खाना न मिलने की सजा, खाने के बाद अपने बर्तन खुद ही साफ करना, ऑफिस और घर मे कोई फर्क ही नहीं रहजना, ये सब नया था और मुश्किल भी, शायद इसलिए कि पहली बार घर से इतनी दूर था।

लेकिन कभी कभी ऐसा लगता है एक साल ही तो कब कट जायेगा पता ही नहीं चलेगा, फिर लगता एक साल काटने के लिए नही जीने के लिए है, वो जिंदगी जीने के लिए जो पिछले 22 सालो में घर के पास रहकर नहीं जी पाया।

इस एक महीने में बहुत कुछ हुआ, अलग-अलग लोगो से मिलना, अलग-अलग जगह घूमना, कहते है लोग आज के जमाने में एक रुपए का भी भरोसा नहीं करते एक दूसरे पे, ये लाइन शहर के लोगो के लिए ही बनी है, क्योंकि गांव में जहां भी गया वहा ऐसा लग रहा था मानो में उनके ही परिवार का सदस्य हुँ, दो रातो को अलग-अलग परिवारो के साथ रहा, उनका तो पता नहीं मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, उनके बीच रहना, लेकिंग मज़ा भी बहुत आ रहा था, ये सोचकर की अब तक जिंदगी के इस अनछुए पहलु से अनजान था, उस मंज़िल से अनजान था, जिसकी तस्वीर अब कुछ साफ होती नज़र आ रही है।

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