ग्यान On Wheels!

Bus

बबिता: “अरे! ऐसे नहीं करना चाहिए था तुझे! अच्छा लड़का हैं वो. थोड़ा झिगझिग करता हैं पर दिल से अच्छा हैं”.
उषा: “हां सीमा, वो जो बात दिल में हैं वो साफ साफ बोल देता हैं. एक और chance दे दे उस को”.

Share Auto

ऑटो वाले भैय्या: “कहा जाओगे?”
मैं: “चिचगड”
मेरे बाजु में बैठे हुए ‘भाऊ’: “चिचगद में कहा पे रहते हो? में भी वहा का हूँ. आपको कभी देखा नहीं”
मैं: “हां जी, में कुछ ही दिन पहले आयी हूँ, वो सरकार की तरफ से जो शेतकरी संगठन बन रहा है उसका काम करने के लिए.”
‘भाऊ’: “अच्छा आप उन में से हो. कटकवारजी के घर पे जो आफिस हैं वोही ना?”
मैं: “हां जी, उन के घर के बगल में. आप जानते हो कार्यक्रम के बारे में?”
‘भाऊ’: “में एक बार मीटिंग में आया था. आदिवासी महिलाओं का विकास करेंगे ऐसे बोल रहे थे! कार्यक्रम सुन के तो अच्छा लगता है जी पर मेरी बात मनो तो ये आदिवासी लोग सुधरने वाले नहीं है. सरकार का पैसा खा खा के चुप हो जाते है. आप जैसे बहुत लोग आ के चुतिया भी बना गए उन को”
मैं: “हां जी, बराबर है आपका कहना पर उन को समझाकर, के उन को रोजगार मिलने के लिए हम सरकार की तरफ से ये काम कर रहे है, जिस से उन को बहुत लाभ मिलने वाला है, यही तो बड़ी बात है. अभी एक गाव में १०-१५ लोग भी जुड़े तोह आगे जा के बाकी के लोग आजाएंगे.”

Bullock Cart

चलती हुई बैल गाड़ी के पीछे गुडिया (मेरी पड़ोस वाली) और मैं भागते हुए:
मैं: “भैय्या चढ़ जाए क्या?”
गुडिया: “चलो दीदी, बैठ जाइये!”
धाडस कर के jump मार के पहली बार बैल गाड़ी पर बैठने की ख़ुशी में और थोडासा pant फटने के अफ़सोस में बैठे होते हुए बैल गाड़ी वाले भाईसाब बोले: “ओजी, थोड़ा बीच में आजाओ. side में बैठने से balance चला जाता हैं. एक ही बैल पे ज्यादा वजन आ जाता हैं”
मैं: “ठीक है जी, वैसे किस का बोरी लेके जा रहे हो आप?”
भाईसाब: “धान का बोरी है जी, सोसाइटी को देने ले जा रहा हूँ.”
मैं: “सोसाइटी क्या करती है उस का?”
भाईसाब: “कुछ नहीं जी, गोदाम में पड़ा सड जाता है माल; पर क्या करे, सरकार है तो उन को क्या फरक पड़ता है, हमें तो पैसे मिल जाते हैं”
मैं: “कैसे क्विंटल बेचते हो? खुद के लिए रखते हो की नहीं?”
भाईसाब: “१६५० से देते है. २ बोरी घर के लिए रख के बाकी को बेच देते है”
गुडिया: “अरे दीदी आप का सर्वे बाद में कर लेना! उतर जाइये! नहीं तो इन के साथ मोहांड़ी पहुंच जाएंगे!”

Bike पे बडोलेजी (हुमरे local resource person) के साथ रात को 8 बजे जंगल से जाते हुए

बडोलेजी: “गायत्री, इतने रात को अँधेरे में बाइक पे जाते हुए डर नहीं लगता?”
मैं: “नहीं जी, इस में डरने की क्या बात है? आप हो ना साथ में!”
बडोलेजी: “धीरे से बात करते हुए “नहीं मतलब कोई नक्सलवादी तुझे उठा के ले गए तो?”
मैं: “कोई नहीं जी, उन को भी हमारे मीटिंग में जो बताती हूँ वो बता दूंगी!”
बडोलेजी: “पर में क्या बताऊंगा ALC वालोंको? और वो दुसरे गाव के सरपंच जैसे मुझे कांट दिया तो?”
मैं: “घबराइए मत, में हूँ ना!”

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